India BPO Promotion Scheme
माननीय केंद्रीय रेल, संचार तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री की ओर से संदेश

श्री अश्विनी वैष्णव


पिछले दो दशकों के दौरान, भारतीय आईटी/आईटीईएस उद्योग पर्याप्त परिपक्व हो चुका है और मूल्य श्रृंखला में ऊपर चला गया है। आईटी/ आईटीईएस उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद में काफी योगदान दे रहा है और लाखों लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है। मुझे एसटीपीआई पर आईटी/आईटीईएस उद्योग की सफलता में उसके योगदान और भारत को एक पसंदीदा आईटी गंतव्य बनाने के लिए गर्व है। अब, इस मोड़ पर, हमें आईटी क्षेत्र में हमारी मजबूत नींव का लाभ उठाना चाहिए और अपना ध्यान आईटी की सहायता से छोटे शहरों के समावेशी विकास की ओर केंद्रित करना चाहिए । यह जनसांख्यिकीय बदलाव समय की मांग है और इससे डिजिटल विभाजन को कम करने में मदद मिलेगी। इसे ध्यान में रखते हुए, मेरे मंत्रालय ने डिजिटल इंडिया पहल के तहत भारत बीपीओ संवर्धन योजना (आईबीपीएस) और नॉर्थ ईस्ट बीपीओ संवर्धन योजना (एनईबीपीएस) की शुरूआत की है । इन योजनाओं का उद्देश्य छोटे शहरों के स्थानीय युवाओं के लिए लगभग 1.5 लाख रोजगार के अवसर पैदा करना और संबंधित क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए निवेश को आकर्षित करना है। ये योजनाऐं छोटे शहरों के विकास के लिए उचित पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद करेंगी और उन क्षेत्रों में समृद्धि लाएंगी और मुझे उम्मीद है कि इसका आने वाले समय में अर्थव्यवस्था पर गुणात्मक प्रभाव होगा। मैं एसटीपीआई को दोनों योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेंसी होने के लिए बधाई देता हूं और मै काफी आशावादी भी हूं कि एसटीपीआई अपनी व्यावसायिकता बनाए रखेगी, जिसके लिए उसे जाना जाता रहा है ।
माननीय कौशल विकास और उद्यमिता तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री की ओर से संदेश

श्री राजीव चंद्रशेखर

बीपीओ/आईटीईएस उद्योग देश में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के तहत तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में से एक है। इसमें वैश्विक मानकों और निहित लागत लाभ के साथ बराबरी पर परिणाम देने की तत्परता के साथ आगे बढ़ने व विस्तार की अपार क्षमता है। वर्तमान में, इस क्षेत्र से अधिकतर राजस्व, बंगलुरू, चेन्नई, दिल्ली एनसीआर, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और पुणे के महानगरीय और आसपास के क्षेत्रों से प्राप्त होता है । देश के अन्य भागों मे, प्रतिभाऐं और बुनियादी सुविधाऐं मौजूद होने के बाद भी, इस वैश्विक उछाल का लाभ अभी तक नहीं ले पा रहे हैं । इस पहलू को ध्यान में रखते हुए डिजिटल इंडिया पहल के तहत भारत बीपीओ संवर्धन योजना (आईबीपीएस) और नॉर्थ ईस्ट बीपीओ संवर्धन योजना (एनईबीपीएस) को देश भर में समावेशी विकास के लिए परिकल्पित किया गया है। ये योजनाऐं देश भर में स्मार्ट डिजिटल उद्यमों की स्थापना को प्रोत्साहित और बीपीओ/आईटीईएस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देते हुए युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेंगी । 1.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और उसी अनुपात में बडी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता के साथ, यह परिकल्पना की गई है कि ये योजनाऐं आईटी/आईटीईएस आधारित विकास की अगली लहर की बुनियाद बन सकती है और आने वाले समय में अर्थव्यवस्था पर एक गुणक प्रभाव डालेंगी । मुझे विश्वास है कि एसटीपीआई इन योजनाओं के सफल कार्यान्वयन की दिशा में अपनी प्रभावशाली साख और विशेषज्ञता का लाभ उठाने में सक्षम होगा और डिजिटल इंडिया पहल की परिकल्पना "भारत को एक डिजिटल सशक्त समाज व ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना" को प्राप्त करने में सहायक होगा।

सीटों का आवंटन

निधि स्वीकृत और प्रतिवेदित व्यय

रोजगार की प्रतिवेदन

प्रमुख आंकड़े

कुल सीटों की संख्या : 48,300
आज तक कुल आवंटित सीटें : 57,697
वर्तमान में आवंटित सीटें : 44,192 विस्तृत आवंटन
बजट परिव्यय : रु 493 करोड़
परिचालन/कार्यकाल पूर्ण बीपीओ / आईटीईएस इकाइयाँ : 228
शहरों की संख्या जहाँ इकाइयां परिचालन/कार्यकाल पूर्ण हैं : 94
स्टेट वाइज यूबीपीओ / आईटीईएस इकाई विवरण :यहाँ क्लिक करें
आयोजित प्रचार कार्यक्रम : 71 कार्यक्रम
अंतिम प्रकाशित आरएफपी:
पिछले आरएफपी का संग्रह : यहाँ क्लिक करें
आईबीपीएस का नवीनतम प्रशासनिक अनुमोदन: यहाँ क्लिक करें

योजना के बारे में

भारत बीपीओ संवर्धन योजना (आईबीपीएस) , डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत देश भर में बीपीओ/आईटीईएस के संचालन के लिए 48,300 सीटों की स्थापना को प्रोत्साहित करने हेतु परिकल्पित है।
इसे 493 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ राज्य की जनसंख्या के अनुपात में प्रत्येक राज्य के बीच वितरित किया गया है। इससे छोटे शहरों में बुनियादी सुविधाओं और जनशक्ति के रूप में क्षमता निर्माण में मदद मिलेगी और आईटी/आईटीईएस आधारित विकास की अगली लहर की बुनियाद तैयार होगी।
मुख्य विशेषताएं:
  1. पूंजीगत सहायता: 1 लाख रुपये/सीट की अधिकतम सीमा के साथ स्वीकार्य मदों पर किए गए एकमुश्त पूंजीगत व्यय और/या परिचालन व्यय का 50% तक।
  2. महिलाओं और दिव्यांगो के रोजगार हेतु विशेष प्रोत्साहन।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों सहित राज्य के भीतर व्यापक प्रसार एवं लक्ष्य से अधि‍क रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहन।
  4. स्थानीय उद्यमियों के लिए प्रोत्साहन।
  5. पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उतराखंड के लिए विशेष ध्यान।
तीन पारियों के संचालन को ध्यान में रखते हुए, इस योजना में लगभग 1.5 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता है। इससे अच्छी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढेंगें । अधिक जानकारी के लिए आरएफपी दस्तावेज देखें.
राज्य की आईटी नीतियों के बारे में विस्तार से जानें

सूचना

बीपीओ/आईटीईएस इकाइयों के लाभ के लिए दिनांक 21.12.2020 के नवीनतम प्रशासनिक अनुमोदन में कुछ संशोधन किये गए हैं।संक्षिप्त विवरण के लिए यहाँ क्लिक करें